सुभाष चंद्र बोस का जीवन परिचय Story in Hindi

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Subhash Chandra bosh Ka Jivan Parichay Kahani Hindi| सुभाष चन्द्र बोस का जीवन परिचय कहानी हिंदी में | Subhash Chandra Bose’s Biography in Hindi

Subhash Chandra bosh Ka Jivan Parichay Kahani Hindi,  अमृत संदेश भारत की जनता के हृदय सम्राट नेताजी सुभाष चंद्र बोस ने दिया था जो महात्मा गांधी के साथ देश को स्वतंत्रता दिलाने प्रयासरत थे, नेता जी सुभाष चन्द्र बोस भारत के एक क्रन्तिकारी व्यक्ति थे, पुरे भारत में नेता के name से महसूर थे, जो भारत को आजादी दिलाने के लिए कई संघर्ष का सामना किया था, नेता सुभाष चन्द्र बोस का जीवन में अनेक संघर्ष को देखते हुए आज भी लाखो लोगो के दिल में याद है जो बहुत साहसी  व्यक्ति थे (Subhash chandra ka Jivan Parichay Hindi story, Subhash Chandra Boss Biography Story in Hindi)

तुम मुझे खून दो मैं तुम्हें आजादी दूंगा

उनकी आवाज में जादू था उनमें भाषण की शक्ति और संगठन की क्षमता थी, उनका जीवन कर्तव्य की मूर्ति था

सुभाष चंद्र बोस( Subhash Chandra Bose) का जन्म 22 जनवरी 1897 ईसवीं को कटक (उड़ीसा) में हुआ था, इनके पिता का नाम बाबू जानकी नाथ बोस था, सुभाष चंद्र बोस राष्ट्रीय नेता 5 वर्ष की आयु में मिशनरी स्कूल में प्रविष्ट हुए, सुभाष चंद्र बोस मेधावी छात्र थे,

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Subhash Chandra Bose ka jeevan parichay

1993 में सुभाष चंद्र बोस( Subhash Chandra Bose) ने मैट्रिक परीक्षा पास की, उसके बाद कलकत्ता में b.a. तक शिक्षा प्राप्त की, उंची शिक्षा के लिए सुभाष चंद्र बोस को विलायत भेजा गया, राष्ट्रीय नेता सुभाष चंद्र बोस I.C.A की परीक्षा में छठा स्थान प्राप्त किया

भारत लौटने पर अंग्रेज सरकार ने सुभाष चंद्र बोस को उच्च स्थान दिया किंतु अंग्रेजों द्वारा की गई भारतीय जनता की दुर्दशा को देख कर सुभाष चंद्र बोस ने नौकरी से त्यागपत्र दे दिया, और देश सेवा के लिए गांधीजी के असहयोग आंदोलन में जुट गए

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इस पर सुभाष चंद्र बोस( Subhash Chandra Bose) को 6 महीने के लिए जेल में डाल दिया गया, 1924 में महात्मा गांधी जी के नमक सत्याग्रह में कथा 1935 में भी सुभाष चंद्र बोस( Subhash Chandra Bose) ने जेल यात्रा की

सुभाष चंद्र बोस यूरोप से लौटने पर इनको कांग्रेस का सभापति चुना गया परंतु यह गर्म विचारों के थे अतः गांधी जी के नरम विचारों से इनका मेल न खाया, इन्होंने शीघ्र ही सभापति पद त्याग दिया और नया “फॉरवर्ड ब्लॉक” दल बना लिया

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सुभाष चंद्र बोस( Subhash Chandra Bose) जोशीले भाषण से घबराकर अंग्रेज सरकार ने इनको घर पर नजरबंद कर दिया, इन्होंने घर में रहते हुए दाढ़ी बना ली और वेश बदलकर पेशावर जा पहुंचे, सुभाष चंद्र बोस( Subhash Chandra Bose) अनेक कष्टों को झेलते हुए जर्मनी से जापान पहुंचे, यहां पर इन्होंने भारत को स्वतंत्रता करवाने के लिए “आजाद हिंद फौज” की स्थापना की,

इनकी सैनिक शक्ति को देकर अंग्रेजों के पाव उखड़ गए, टोकियो जाते समय 6 फरवरी 1945 को विमान दुर्घटना में सुभाष चंद्र बोस स्वर्ग सिधार गए, सुभाष चंद्र बोस की मृत्यु से सारे देश में सन्नाटा छा गया तथा लोग बहुत दुखी हुए

सुभाष चंद्र बोस( Subhash Chandra Bose) राष्ट्रीय नेता बलिदान ही वह रंग लाया की अंग्रेजों को आजाद हिंद फौज के प्रति मुकदमा चलाते हुए भी उसके नेताओं को क्षमा करना पड़ा और थोड़े ही दिनों में भारत को स्वतंत्र करना पड़ा।(Subhash Chandra Bose Ka Jivan Parichay Hindi Story,Subhash Chandra Bose Biography in Hindi )

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